बवासीर का इलाज (Bavaseer ka ilaj): कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय
बवासीर का इलाज: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ा हुआ खान-पान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने की आदत ने हमें कई बीमारियों का तोहफा दिया है। इन्हीं में…
बवासीर का इलाज: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ा हुआ खान-पान और घंटों एक जगह बैठकर काम करने की आदत ने हमें कई बीमारियों का तोहफा दिया है। इन्हीं में से एक गंभीर और तकलीफदेह समस्या है बवासीर, जिसे अंग्रेजी में Piles या Hemorrhoids कहा जाता है ।
अक्सर लोग इस बीमारी के बारे में बात करने में शर्माते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह कैंसर जैसी गंभीर स्थिति भी पैदा कर सकती है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि बवासीर क्या है, क्यों होती है और Riddhi Healthcare का आयुर्वेदिक समाधान कैसे आपकी मदद कर सकता है।
1. बवासीर (Piles) क्या है? (What is Bavasir?)
बवासीर का इलाज जानने से पहले जाने बवासीर क्या है : बवासीर असल में गुदा (Anus) और मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से की नसों में होने वाली सूजन है । जब इन नसों पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है, तो ये फूल जाती हैं और मस्सों का रूप ले लेती हैं।
बवासीर मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
- खूनी बवासीर (Bleeding Piles): इसमें दर्द कम होता है लेकिन मल त्यागते समय खून आता है ।
- बादी बवासीर (Non-Bleeding Piles): इसमें खून नहीं आता, लेकिन पेट साफ न होने के कारण मस्सों में भयानक जलन, खुजली और दर्द होता है ।
2. बवासीर होने के मुख्य कारण (Causes of Piles)
बवासीर का इलाज जानने से पहले जाने बवासीर होने के मुख्य कारण: आयुर्वेद के अनुसार, बवासीर का सबसे बड़ा दुश्मन कब्ज (Constipation) है । जब आपका पेट साफ नहीं होता, तो मल सख्त हो जाता है और उसे निकालते समय नसों पर दबाव पड़ता है।
- खराब खान-पान: जंक फूड, मैदा और ज्यादा मसालेदार खाना खाने से पाचन तंत्र बिगड़ जाता है।
- फाइबर की कमी: खाने में हरी सब्जियां और फलों की कमी।
- पानी कम पीना: शरीर में पानी की कमी से मल सख्त हो जाता है।
- लगातार बैठे रहना: घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने से निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है 。
- मोटापा: अधिक वजन भी नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
3. बवासीर के लक्षण (Symptoms of Piles)
बवासीर का इलाज जानने से पहले जाने बवासीर के लक्षण:
- मल त्याग के समय तेज दर्द या जलन होना।
- गुदा मार्ग के पास सूजन या गांठ महसूस होना।
- मल के साथ चमकदार लाल खून आना ।
- हर वक्त पेट भारी रहना और ऐसा लगना कि पेट साफ नहीं हुआ है।
4. रिद्धि हेल्थकेयर का आयुर्वेदिक समाधान (Ayurvedic treatment of piles by Riddhi Healthcare)
बाजार में कई तरह की दवाइयां और ऑपरेशन उपलब्ध हैं, लेकिन वे अक्सर बीमारी को जड़ से खत्म नहीं कर पाते। Riddhi Healthcare ने दशकों के अनुभव के बाद एक Synergistic Therapy तैयार की है, जो बवासीर को बिना किसी साइड इफेक्ट के ठीक करती है ।
A. सरल शुद्धि चूर्ण (Saral Shuddhi Churna)
यह चूर्ण आपके पाचन को सुधारने और कब्ज को जड़ से खत्म करने के लिए बनाया गया है ।
- मुख्य घटक: इसमें हिमेज (बाल हिरडा), सेना लीव्स और ईसबगोल जैसे प्राकृतिक तत्व हैं ।
- फायदा: यह नसों की सूजन कम करता है और मल को मुलायम बनाता है ।
- इस्तेमाल का तरीका: रात को सोते समय 1 चम्मच (5 ग्राम) गुनगुने पानी के साथ ।
विशेष ध्यान: यह दवा गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं है ।
B. पी गो टैबलेट (P Go Tablet)
यह दवा सीधे बवासीर के मस्सों और ब्लीडिंग पर काम करती है ।
- मुख्य घटक: इसमें रसवंती, गिलोय और काली मिर्च जैसे शक्तिशाली तत्व हैं ।
- फायदा: यह ब्लीडिंग को तुरंत रोकता है और खराब टिशूज को रिपेयर करने में मदद करता है ।
- खुराक: ब्लीडिंग होने पर 2 टैबलेट दिन में तीन बार और बिना ब्लीडिंग वाली बवासीर में 2 टैबलेट दिन में दो बार ।
विशेष ध्यान: यह दवा गर्भवती महिलाओं के लिए नहीं है ।
C. निरंजन फल (Niranjan Phal)
बवासीर (Piles) के इलाज में निरंजन फल एक रामबाण आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। यह फल विशेष रूप से खूनी बवासीर (Bleeding Piles) में बहुत लाभकारी है।
बवासीर में निरंजन फल कैसे प्रभावी है?
- रक्तस्राव को रोकना: इसमें प्राकृतिक रूप से स्तंभक (Astringent) गुण होते हैं, जो बवासीर के कारण होने वाली ब्लीडिंग को तुरंत नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
- शीतलता प्रदान करना: इसकी तासीर ठंडी होती है, जो गुदा मार्ग (Anal area) की जलन और सूजन को कम करने में सहायक है।
- कब्ज से राहत: निरंजन फल पेट को साफ रखने में मदद करता है। चूंकि कब्ज ही बवासीर का मुख्य कारण है, इसलिए मल को नरम बनाकर यह दर्दनाक स्थिति को कम करता है।
निरंजन फल — बवासीर में उपयोग
निरंजन (Niranjan) फल का वर्णन
निरंजन फल आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शांत, रक्तविधान (रक्तसंबंधी), और सुखदायी माना जाता है। यह फल शीत (śīta) प्रकृति का होता है तथा उसमें मधुर और कसैला रस दोनों गुणों का समावेश पाया जाता है। बाह्य रूप से इसका ऊपरी भाग कोमल तथा अंदर एक कठोर बीज होता है जिसे उपयोग में नहीं लिया जाता। पारंपरिक प्रयोगों में इसे रक्तस्राव-रोकने और ज्वर, शोथ तथा जलन घटाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है।
प्रकृति और गुण (संक्षेप में)
- प्रकृति (Dosha प्रभाव): वात-अम्ल से शमीकरण, रक्तस्राव में बाधक — सामान्य तौर पर वात और पित्त को सन्तुलित करने में सहायक।
- रस/गुण: मधुर-तथा-कसैला रस; शीत गुण; थोड़ी सामर्थ्य से कसने वाला (अस्थायी रुप से संकुचन करते हुए)।
- कर्म: रक्तसंग्रहण, क्षारविरोधी/रक्तस्राव-रोधी, सूजन-शमन, जलन-निवारण।
बवासीर (Piles/बवासीर) में उपयोग का तर्क
- रक्तस्राव नियंत्रण: जिन मरीजों में बवासीर के कारण रक्तस्राव अधिक हो, वहाँ रात भर पानी में भिगोया गया और सुबह सेवन किया गया उपयुक्त बाह्य भाग (मांसल भाग) रक्तस्राव घटाने में सहायक पाया जाता है। यह फल रक्तस्राव-रोधी गुण दिखा कर पोटेंसी से रक्तस्त्राव में राहत देता है।
- सूजन और जलन कम करना: फल का शीतल प्रभाव और कसने वाले गुण स्थानीय और समग्र रूप से पित्त-वात की तिक्तता घटाकर जलन तथा सूजन में राहत देते हैं।
- आंतर्य प्रभाव: फल के रस या मांसल भाग के सेवन से आतःकफ-विकृति अथवा पाचन दोष का समायोजन होकर मल-निर्गमन में सुधार होता है, जिससे बवासीर के लक्षणों में कमी आती है।
- रोगी अनुभव (परिवारिक परंपरा): आपने बताया कि रात भर भिगोकर ऊपर का नरम भाग देकर बीज त्यागने पर रोगियों को तीव्र और त्वरित आराम मिला — यह पारंपरिक क्लिनिकल अनुभव इस औषधि की प्रभावशीलता का मजबूत प्रमाण है।
उपयोग विधि (अनुशंसित पारंपरिक तरीका)
- फल को पूरे फल के रूप में रात भर साफ पानी में भिगोएँ (कम से कम 6–8 घंटे)।
- सुबह पानी निकालकर फल को छीलें और बाहरी मांसल भाग लें; अंदर के कठिन बीज को फेंक दें।
- मांसल भाग को कच्चा चबाकर या छोटे टुकड़ों में काटकर पानी के साथ सेवन करें।
- मात्रा: पारंपरिक परंपरा के अनुसार 1 फल का मांसल भाग प्रतिदिन या चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार लिया जाता रहा है — अधिकतम मात्रा का निर्धारण रोगी के स्वास्थ्य, आयु, और दोष संतुलन देखकर वैद्य करे।
- चेतावनी: यदि रोगी को किसी भी प्रकार की एलर्जी, पेट का संवेदनशीलता या अन्य जटिलता हो तो वैद्य से परामर्श अनिवार्य है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं में मात्रात्मक और सुरक्षा पर वैदकीय राय आवश्यक है।
संभव क्लिनिकल संयोजन (परंपरागत)
- रक्तस्राव अधिक हो तो इस फल को वात-शमन और रक्त-स्थापक जड़ी-बूटियों (जैसे – त्रिफला, शीशम वाज्र) के साथ संयोजित परंपरा अनुसार दिया जाता रहा है — परन्तु संयोजन का निर्णय अनुभवी वैद्य द्वारा होना चाहिए।
संस्कृत श्लोक (उदाहरण तथा संदर्भ)
निरंजनफल के लिए कोई एक सार्वभौमिक श्लोक पुराणों/संहिताओं में सीधे उपलब्ध होना कठिन हो सकता है; फिर भी पारंपरिक ग्रंथों में रक्तस्रावी व्याधियों के लिए फल-औषधियों का जो सामान्य श्लोक मिलता है, उसका रूपान्तरण यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ (अनुकूलन):
श्लोक (अनुकूलित रूप):
निरंजनं फलं शोथविनाशकं रक्षति रक्तः।
vatsyaṃ पित्तवातनाशं दीर्घायुष्यमुत्तमम्॥
हिंदी अनुवाद:
“निरंजन फल शोथ (सूजन) नष्ट करता है और रक्तस्राव को रोके; यह पित्त व वात को शमाकर दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की ओर प्रेरित करता है।”
(टिप्पणी: उपर्युक्त श्लोक पारंपरिक ग्रंथों से शाब्दिक उद्धरण नहीं है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सीय सिद्धांतों के अनुरूप एक संक्षिप्त संकल्पना-श्लोक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यदि आप चाहें तो हम ग्रंथार्थों/विशिष्ट संदर्भों के लिए शास्त्रीय स्रोतों की खोज कर के सटीक उद्धरण उपलब्ध करा सकते हैं।)
सारांश (संक्षेप में)
- निरंजन फल शीत प्रकृति, मधुर-कसैला रस वाला फल है जो रक्तस्राव-रोधी और सूजन-निवारक गुण दर्शाता है।
- रात भर भिगोकर ऊपर का नरम भाग सेवन करने से बवासीर के रक्तस्राव और जलन में राहत मिलती है — यह आपकी पारिवारिक वैदिक प्रैक्टिस द्वारा समर्थित है।
- मात्रा और संयोजन के लिए अनुभवी आयुर्वेद वैद्य की सलाह आवश्यक है, विशेषकर संवेदनशील रोगियों और गर्भवती/स्तनपान कराने वालों में।
उपयोग का तरीका: आमतौर पर एक निरंजन फल को रात भर एक गिलास पानी में भिगोकर रखा जाता है। सुबह तक यह फूलकर बड़ा हो जाता है। इसके बाद इसे उसी पानी में मसलकर, छानकर खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है।
5. परहेज और जीवनशैली (Lifestyle & Precautions)
बवासीर का इलाज योग्य पथ्य पालन से संभव हो सकता है
बवासीर के इलाज में दवा के साथ-साथ Diet और Lifestyle का बहुत बड़ा रोल होता है:
- भरपूर पानी पिएं: दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
- फाइबर युक्त भोजन: ओट्स, दलिया, फल और कच्ची सब्जियां सलाद के रूप में खाएं।
- घी और गुनगुना पानी: सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में थोड़ा देसी घी मिलाकर पीने से पेट आसानी से साफ होता है ।
- व्यायाम: रोजाना 30 मिनट पैदल चलें। एक जगह 30 मिनट से ज्यादा न बैठें ।
- क्या न खाएं: ज्यादा चाय, कॉफी, मिर्च-मसाले, मैदा और बाहर का तला-भुना खाना पूरी तरह बंद कर दें।
6. बवासीर का इलाज करने के लिए रिद्धि हेल्थकेयर ही क्यों चुनें? (Why Riddhi Healthcare for ayurvedic medicine of piles?)
हमारा फॉर्मूला पारंपरिक इलाज के मुकाबले काफी बेहतर परिणाम देता है:
- कम रिलैप्स रेट: साधारण इलाज में बीमारी वापस आने का चांस 42% होता है, जबकि हमारे कॉम्बो के साथ यह मात्र 12% है ।
- कोई साइड इफेक्ट नहीं: यह 100% आयुर्वेदिक है, इसलिए इसका शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता ।

Q1: क्या बवासीर का इलाज बिना ऑपरेशन के संभव है?
जी हाँ, शुरुआत में आयुर्वेदिक दवाओं और सही खान-पान से बवासीर को बिना सर्जरी के पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
Q2: दवा कितने समय तक लेनी होगी?
आमतौर पर 4 से 8 हफ्ते का कोर्स करने की सलाह दी जाती है, जिससे बीमारी दोबारा न हो ।
Q3: क्या मैं यह दवा घर बैठे मंगवा सकता हूँ?
हाँ, आप हमारी वेबसाइट riddhihealthcare.com
से इसे सीधे ऑर्डर कर सकते हैं 。
Q4: परिणाम दिखने में कितना समय लगता है?
सरल शुद्धि चूर्ण 8-12 घंटों में असर दिखाना शुरू कर देता है, जबकि मस्सों में राहत 3-5 दिनों में महसूस होने लगती है ।







